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यादव-मुस्लिम ही नहीं… ब्राह्मण और क्षत्रियों ने भी दिलाई सपा को जीत, मुलायम से एक कदम आगे निकले अखिलेश यादव
- न्यूज़
- Thursday | 6th June, 2024
प्रदेश की राजनीति में एक समय ऐसा भी था जब सपा का एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण बेहद कामयाब हुआ था, किंतु आज बदली हुई राजनीति में केवल इन दोनों के सहारे सफलता नहीं पाई जा सकती है। गैर यादव पिछड़ी जातियों पर फोकस सपा अध्यक्ष ने इसे अच्छी तरह समझते हुए अपने मजबूत वोट बैंक में दूसरे जातियों के मत जोड़ने के लिए पीडीए रणनीति पर काम किया।
गैर यादव पिछड़ी जातियों व दलित मतदाताओं को फोकस करते हुए उन्होंने इस बार जो टिकट दिए उसका लाभ उन्हें चुनाव परिणाम में सर्वाधिक सीटें पाकर मिल गया है।
अखिलेश ने सोशल इंजीनियरिंग के जरिए राजनीति में जातियों का नया गुलदस्ता तैयार किया है। सामान्य सीट पर दलित कार्ड आईएनडीआईए के तहत प्रदेश में सपा इस बार 62 सीटों पर चुनाव लड़ी थी।
सपा ने इस बार सर्वाधिक 17 टिकट दलितों को दिए।
खास बात यह है कि मेरठ व फैजाबाद सामान्य सीट पर भी सपा ने दलित कार्ड खेला। नौ बार के विधायक अवधेश प्रसाद ने भाजपा के लल्लू सिंह को फैजाबाद सीट से हराकर भाजपा को बड़ा झटका दिया है।
इन 17 में से आठ सीटों पर सपा को सफलता मिली है।
इनमें राबर्ट्सगंज, मछलीशहर, फैजाबाद, लालगंज, कौशांबी, जालौन, इटावा व मोहनलालगंज लोकसभा सीट हैं। कुर्मी व पटेल को 10 टिकट सपा ने पिछड़ी जातियों में सबसे अधिक 10 टिकट कुर्मी व पटेल बिरादरी को दिए थे।
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