Krishna Janmabhoomi Case: चार वर्ष पहले सुनवाई योग्य न मान खारिज हुआ था वाद, अब मिली विजय

कमेटी पक्ष बार-बार कहता रहा सुनवाई योग्य नहीं वाद हाई कोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़े वादों को पोषणीयता को लेकर शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी एक ही बात कहती है कि कोई भी वाद सुनवाई योग्य नहीं हैं।

तर्क दिए कि पूजा स्थल अधिनियम-1991 कहता है कि 15 अगस्त 1947 को जो पूजा स्थल अधिनियम जैसा था, उसमें कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।

1968 में हुए समझौते के इतने साल बाद वाद दायर करना भी कानून के बाहर है। भूमि जन्मभूमि ट्रस्ट की, समझौता सेवा संघ ने किया श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के बीच विवाद ही वर्ष 1968 में हुए समझौते को लेकर है।

सभी वादों में कहा किया है 13.37 एकड़ भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के नाम है।

इसी भूमि पर 1669-70 में औरंगजेब ने एक हिस्से में शाही मस्जिद ईदगाह बनाया। श्रीकृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट 1951 में गठित हुआ।

1968 में ट्रस्ट के कार्यों को देख रही संस्था श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के बीच 10 बिंदुओं पर समझौता किया।

इसी समझौते के विरोध में वाद दायर किए गए हैं। कहा गया है कि जब भूमि ट्रस्ट के नाम है, तो सेवा संघ को समझौता करने का अधिकार ही नहीं है।

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