पश्चिमी यूपी में आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था बेहाल, कहीं एक कमरे में तो कहीं घर में ही आंगनबाड़ी चलाने को मजबूर हैं कार्यकर्ता

संक्षेप:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में एक-एक कमरा कराया गया उपलब्ध।
  • सरकार की निर्धारित मानकों के अनुसार भवन नहीं मिलने के कारण अपने घरों में ही केंद्र चला रही हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।
  • विभाग द्वारा सोमवार और गुरुवार को बच्चों को बुलाने के आदेश।

मेरठ. उत्तर प्रदेश के बिजनौर में कई आंगनबाड़ी केंद्र छोटे से कमरे में चल रहे हैं। नगीना क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की खुद की व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में एक-एक कमरा इन्हें उपलब्ध कराया गया है। सरकार की ओर से निर्धारित किराए और मानकों के अनुसार भवन नहीं मिलने के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने घरों में ही केंद्र चला रही हैं।

कोतवाली ब्लॉक में कुल 389 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं, जिसमें से 27 नगर क्षेत्र नगीना में स्थित हैं। विभाग की मानें तो सरकार द्वारा निर्धारित मानक व किराए के अनुसार उपयुक्त भवन नहीं मिलने के कारण नगर में आंगनबाड़ी केंद्र आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा खुद वैकल्पिक व्यवस्था से चलाए जा रहे हैं। 



हकीकत में नगर क्षेत्र की अधिकतर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने घरों से ही केंद्र को चला रही हैं। बताया जाता है विभाग द्वारा सोमवार और गुरुवार को बच्चों को बुलाने के आदेश हो जाने के बावजूद शहरी क्षेत्र में बच्चों की संख्या आंगनबाड़ी केंद्रों पर न के बराबर दिखाई दे रही है। 

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ग्रामीण इलाकों से खराब है नगरीय क्षेत्रों की स्थिति

ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति नगरीय क्षेत्र से कुछ बेहतर है। यहां अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी प्राइमरी व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में चल रहे हैं, जबकि कहीं-कहीं विभाग द्वारा भी अलग से एक कमरा बनवाकर उसमें केंद्र चलाए जा रहे हैं, जहां बच्चों की संख्या भी पर्याप्त नजर आती है।

ब्लॉक कोतवाली के बाल विकास परियोजना अधिकारी सोनवीर त्यागी ने बताया कि उनके ब्लॉक के नगर व ग्रामीण क्षेत्र में कहीं भी कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर नहीं चल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर सरकारी विद्यालयों में आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। 

कई जगह विभाग के अपने भवन में भी केंद्र चलाए जा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को एक किलो दाल का पैकेट व राशन डीलर से एक-एक किलो गेहूं/ चावल व आधा किलो सोयाबीन तेल का पैकेट दिया जाता है। लेकिन यह सुविधा आंगनबाड़ी केंद्र पर पंजीकृत गर्भवती महिलाओं को ही मिलती है। 

नगरीय क्षेत्र में किराए के भवन न होने की बात पर उनका कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित मानक व निर्धारित किराए पर उपयुक्त भवन नहीं मिल रहे हैं, जिसके लिए शासन को कई बार लिखा जा चुका है।

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