- होम >>
जिसकी हत्या में काटी तीन साल जेल, वो मुजफ्फरपुर में जिंदा मिला; चौंकाने वाला है मामला
- न्यूज़
- Thursday | 5th June, 2025
अभियोजन का काम किसी को सजा दिलवाना नहीं है, बल्कि सत्य को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना है।
विवेचक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि शव की शिनाख्त एताब के स्वजन ने की थी।
इसलिए अभियुक्त दोषमुक्त किये जाने योग्य है।
अपर जिला जज पंकज कुमार श्रीवास्तव ने उनके तर्कों व साक्ष्य से सहमत होते हुए नरेन्द्र को दोषमुक्त करते हुए रिहा करने के आदेश दिए।
उन्होंने आदेश में कहा कि किसी भी प्रकरण में अपराध को साबित करने का भार अभियोजन का होता है।
अभियोजक न्यायालय का मित्र होता है और उसे न्याय प्रदान करने के लिए न्यायालय की हरसंभव सहायता करनी चाहिए।
यह कहना बहुत मुश्किल है कि जो व्यक्ति मरा वह व्यक्ति कौन था।
If You Like This Story, Support NYOOOZ
Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.






डिसक्लेमर :ऊपर व्यक्त विचार इंडिपेंडेंट NEWS कंट्रीब्यूटर के अपने हैं,
अगर आप का इस से कोई भी मतभेद हो तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखे।