Chandrayaan-2: काउंटडाउन शुरू, तय समय में चांद की सतह पर उतरेगा चंद्रयाण- 2, 978 करोड़ का है प्रोजेक्ट

संक्षेप:

  • दोपहर 2:43 बजे सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा चंद्रयान-2
  • चंद्रयान-2 में लिक्विड कोर स्टेज पर ईंधन भरने का काम भी पूरा हुआ.
  • चांद के साउथ पोल पर स्पेसक्राफ्ट उतारने वाला पहला देश बनेगा भारत.

नई दिल्ली: भारत सोमवार को अपने महत्वाकांक्षी स्पेश मिशन चन्द्रयान-2 को लॉन्च करने जा रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन डॉक्टर के. सिवन ने शनिवार को बताया कि हम 22 जुलाई को 2:51 बजे अपने सबसे प्रतिष्ठित मिशन चन्द्रयान-2 को लॉन्च करने जा रहे हैं. इस मिशन के लिए भारत के सबसे ताकतवर रॉकेट GSLV MK-3 का इस्तेमाल होगा. सफल लॉन्चिंग के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-2 के लैंड करने में करीब 2 महीने का वक्त लगेगा. मिशन सफल रहा तो चंद्रयान-2 के 6 सितंबर को चांद की सतह पर उतरने की संभावना है.

इस बार चांद की सतह पर उतरेगा चंद्रयान

चंद्रयान-2 मिशन की खास बात यह है कि इस बार यह चांद की सतह पर उतरेगा. 2008 में लॉन्च हुआ चंद्रयान-1 चंद्रमा की कक्षा में गया जरूर था लेकिन वह चंद्रमा पर उतरा नहीं था. उसे चांद की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित कक्षा में स्थापित किया गया था.

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कुल लागत 978 करोड़ रुपये

चंद्रयान-2 मिशन पर कुल 978 करोड़ रुपये की लागत आई है. करीब एक दशक पहले चंद्रयान-1 ने चांद की सतह पर पानी की खोज की थी, जो बड़ी उपलब्धि थी. यही वजह है कि भारत ने दूसरे मून मिशन की तैयारी की. चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा जहां उम्मीद है कि बहुतायत में पानी मौजूद हो सकता है.

हिलियम-3 गैस की भी संभावना तलाशेगा

चंद्रयान-2 मिशन के तहत चांद की सतह पर एक रोवर को उतारा जाएगा जो अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा. रोवर चांद की मिट्टी का विश्लेषण करेगा और उसमें मिनरल्स के साथ-साथ हिलियम-3 गैस की संभावना तलाशेगा, जो भविष्य में ऊर्जा का संभावित स्रोत हो सकता है.

कुल 14 पेलोड

चंद्रयान-2 पर कुल 14 पेलोड होंगे, जिनमें 13 भारतीय और एक NASA का पेलोड है. ऑर्बिटर पर 8, लैंडर पर 4 और रोवर पर 2 पेलोड होंगे. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का इकलौता पेलोड लैंडर पर होगा.

कब तक चलेगा मिशन?

15 जुलाई को लॉन्चिंग के बाद 6 सितंबर को चंद्रयान के चांद की सतह पर उतरने की उम्मीद है. वहां लैंडर और रोवर 14 दिनों तक ऐक्टिव रहेंगे. ऑर्बिटर 1 साल तक ऐक्टिव रहेगा और चांद की कक्षा में चक्कर लगाता रहेगा.

ऐसे होगी लैंडिंग

लॉन्च के बाद धरती की कक्षा से निकलकर चंद्रयान-2 रॉकेट से अलग हो जाएगा. रॉकेट अंतरिक्ष में नष्ट हो जाएगा और चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा. ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा का चक्कर लगाना शुरू कर देगा. उसके बाद लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से पर उतरेगा. यान को उतरने में लगभग 15 मिनट लगेंगे और तकनीकी रूप से यह लम्हा बहुत मुश्किल और चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि भारत ने पहले कभी ऐसा नहीं किया है. लैंडिंग के बाद लैंडर का का दरवाजा खुलेगा और वह रोवर को रिलीज करेगा. रोवर के निकलने में करीब 4 घंटे का समय लगेगा. फिर यह वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चांद की सतह पर निकल जाएगा. इसके 15 मिनट के अंदर ही इसरो को लैंडिंग की तस्वीरें मिलनी शुरू हो जाएंगी.

मिशन का उद्देश्य

- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर पानी के प्रसार और मात्रा का निर्धारण
- चंद्रमा के मौसम, खनिजों और उसकी सतह पर फैले रासायनिक तत्‍वों का अध्‍ययन
- चांद की सतह की मिट्टी के तत्वों का अध्ययन
- हिलियम-3 गैस की संभावना तलाशेगा जो भविष्य में ऊर्जा का बड़ा स्रोत हो सकता है

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