जानिए पाकिस्तानी मूल की महिला फरीदा मलिक नोएडा में क्यों हुई गिरफ्तार?

संक्षेप:

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत 4 वर्ष की सश्रम कैद बरकरार रखी है. चंपावत एसपी लोकेश्वर सिंह चौहान के मुताबिक, फरीदा मलिक को 12 जुलाई 2019 को बनबसा में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था.

नोएडा। बनबसा बॉर्डर (Banbasa Border) पर जुलाई 2019 में बिना पासपोर्ट (Passport), वीजा (Visa) के पकड़ी गई पाकिस्तान मूल (Pakistani-origin) की अमेरिकी महिला की अपील खारिज हो गई है. जमानत पर चल रही फरीदा मलिक को चंपावत पुलिस (Champawat Police) ने यूपी के नोएडा (Noida) से गिरफ्तार किया है.

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत 4 वर्ष की सश्रम कैद बरकरार रखी है. चंपावत एसपी लोकेश्वर सिंह चौहान के मुताबिक, फरीदा मलिक को 12 जुलाई 2019 को बनबसा में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था. सीजेएम कोर्ट ने 5 मार्च 2020 को फरीदा को दोषी पाते हुए 4 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी. उसे अल्मोड़ा जेल में बंद कर दिया गया था. बाद में फरीदा को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी.

इसके बाद फरीदा ने सीजेएम के आदेश को जिला न्यायालय में चुनौती दी थी. बीते 22 फरवरी को जिला न्यायालय ने फरीदा की याचिका खारिज कर करते हुए उसकी जमानत भी निरस्त कर दी थी. साथ ही, उसके खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी कर दिया था.

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बनबसा थाना पुलिस ने शुक्रवार शाम फरीदा को नोएडा के सेक्टर-18 से गिरफ्तार कर लिया था, जिसे अब लोहाघाट जेल भेज दिया गया है. गौरलतब है कि इंडो-नेपाल बॉर्डर से लगा बनबसा क्षेत्र हमेशा संवेदनशील रहा है.

आंकड़े बताते हैं पिछले 2 साल में अवैध तरीके से घुसपैठ करने के दौरान 9 विदेशी नागरिक पकड़े गए हैं. पकड़े गए लोग पाकिस्तानी मूल, चीनी और तिब्बती हैं. 1 मई 2019 को बनबसा बॉर्डर पर SSB ने बिना वीजा इजरायली नागरिक पकड़ा था. 27 जुलाई 2019 को बिना वीजा 4 चीनी नागरिकों के साथ तिब्बती नागरिक पकड़ा गया था.

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