Lok Sabha Election 2019: जितिन प्रसाद के BJP में जाने की कयासों के बीच इस Tweet से आया Twist

संक्षेप:

  • जितिन प्रसाद के ट्वीट से मामले में आया नया मोड़
  • कांग्रेस ने अटकलों को सिरे से किया खारिज
  • कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा जितिन प्रसाद का जाना

नई दिल्ली: यूपी(Uttar Pradesh) में कांग्रेस(Congress) के बड़े नेता जितिन प्रसाद(Jitin Prasad) के पार्टी छोड़ने की अटकलें शुक्रवार से सुबह से ही तेज हैं. कहा जा रहा है कि वह शाम तक बीजेपी का दामन थाम सकते हैं, लेकिन इस बीच पूरी कहानी में उनके एक ट्वीट से ट्विस्ट भी आ गया है. दोपहर करीब 12 बजे ही जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) ने ट्वीट कर अमित शाह और बीजेपी की बेरोजगारी के मुद्दे पर निंदा की थी. ऐसे में सवाल यह है कि यदि वह बीजेपी में आने वाले हैं तो फिर पार्टी की आलोचना क्यों? कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी उनके पार्टी छोड़ने की अफवाहों को गलत करार दिया है. सूत्रों के मुताबिक इस बार जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) पर धौरहरा की जगह लखनऊ से लड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) ने कहा- यह काल्पनिक सवाल है

इस बीच मीडिया से बात करते हुए जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन करने की खबर का खंडन न कर हवा को और बल दिया है. उन्होंने सीधे तौर पर न तो हां कहा और न ही न कहा. उन्होंने कहा, `ऐसे किसी सवाल का कुछ आधार होना चाहिए. मैं किसी काल्पनिक सवाल का जवाब क्यों दूं. उनके इस जवाब पर नैशनल कॉन्फ्रेंस के लीडर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आखिर वह सीधे तौर पर इन खबरों का खंडन क्यों नहीं करते.

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कांग्रेस ने शायद मना लिया है

हालांकि जितिन प्रसाद(Jitin Prasad) के ट्वीट से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस ने शायद उन्हें आखिरी वक्त में मना लिया है. जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) ने इसमें बीजेपी और अमित शाह को देश में बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार करार देते हुए कहा, `अमित शाह जी, बीजेपी के कारण रोजगार की जो भयावह समस्या देश में व्याप्त है वह उत्तर प्रदेश में और भी गहरी है. कांग्रेस इसको दूर करने हेतु संघर्षरत है, हम यह संघर्ष और तेज करेंगे. आपके स्वास्थ्य सेवा संदर्भित विचारों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.

नाराजगी के पीछे कहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया तो नहीं!

सूत्रों की मानें तो जितिन प्रसाद(Jitin Prasad) की नाराजगी के पीछे दूसरा कारण ज्योतिरादित्य सिंधिया भी बताए जा रहे हैं. कांग्रेस से दो बार सांसद रहे जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) पार्टी के नेतृत्व से भी खुश नहीं हैं. बताया जा रहा है कि कांग्रेस में कार्यसमिति का सदस्य होने के बाद भी पार्टी उन्हें फैसले लेने में शामिल नहीं कर रही है. यूपी की सीतापुर और लखीमपुर संसदीय सीट को लेकर उन्होंने पार्टी के बीच अपनी राय रखी थी लेकिन पार्टी आलाकमान ने उनकी किसी बात का मान नहीं रखा.

कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा जितिन प्रसाद का छोड़ना

जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) अगर कांग्रेस छोड़ते हैं, तो गांधी परिवार से उनकी नजदीकी के कारण पार्टी के लिए यह बड़ा झटका होगा. उनके पिता जितेंद्र प्रसाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और नरसिम्हा राह के सलाहकार रह चुके हैं. जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) को सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह कांग्रेस से जुड़े परिवारों की विरासत संभालने वाले युवा नेताओं में माना जाता रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नजदीकी माने जाने वाले जितिन प्रसाद यूपी अध्यक्ष पद के दावेदार भी थे, लेकिन उनकी जगह अभिनेता से नेता बने राज बब्बर को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया था. कहा जा रहा है कि पार्टी ने सीतापुर और लखीमपुर से दो मुस्लिम नेताओं को टिकट दिया है जिससे जितिन प्रसाद पार्टी से नाराज हैं.

सूत्रों की मानें तो बीजेपी और जितिन प्रसाद (Jitin Prasad)के बीच गुपचुप बात जारी थी. यही कारण है कि बीजेपी ने हरदोई, सीतापुर और मिश्रिख लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किए लेकिन इससे लगी हुई सीट धौरहरा सीट से किसी को टिकट नहीं दिया. कहा जा रहा है कि शाम को बीजेपी में शामिल होने के बाद जितिन प्रसाद (Jitin Prasad)को बीजेपी धौरहरा से अपना उम्मीदवार बना सकती है.

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