Medical Claim: बीमा खरीदते समय छिपाई ऐसी बात, कंपनी ने नहीं दिया क्लेम; अब ब्याज और हर्जाने के साथ देने होंगे 30 लाख

उन्हें कैंसर रोग विशेषज्ञ से संपर्क की सलाह मिली।

जांच-पड़ताल में उन्हें मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित पाया गया।

इसके बाद उन्होंने बीमा का दावा किया, लेकिन कंपनी ने दावा निरस्त कर दिया। दावा निरस्त होने के बाद केशव ने क्या किया? केशव सिंह ने अपनी बीमा पॉलिसी खरीदते समय यह नहीं बताया था कि उन्हें एनीमिया है।

परंतु, उनका दावा निरस्त हो चुका था, ऐसे में उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण में जाना बेहतर समझा। इस तरह 17 अगस्त 2021 में उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में अपना वाद दायर कर दिया। जिला उपभोक्ता आयोग में केशव के साथ क्या हुआ? जिला उपभोक्ता आयोग में केशव सिंह के मामले की आयोग अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार ने सुनवाई की।

इस दौरान उनके खून की जांच रिपोर्ट भी आयोग के समक्ष पेश की गई। इस जांच रिपोर्ट में केशव के खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा 76 प्रतिशत बताई गई थी।

सुनवाई में आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए एनीमिया होने की जानकारी नहीं देने को दावा निरस्त करने का एकमात्र आधार मानने से इनकार कर दिया। केशव को अब क्या मिलेगा? बता दें कि आयोग ने सुनवाई के बाद अब केशव सिंह के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है।

आयोग अध्यक्ष और सदस्य ने अपने फैसले में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 30 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। आयोग ने यह भी कहा कि ब्याज की गणना आयोग में मामला आने की तिथि (17 अगस्त, 2021) से की जाएगी।

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