Rahul Gandhi: बिहार में राहुल गांधी ने ऐसा क्या किया? हार कर भी कमबैक कर गई कांग्रेस

इस बार कांग्रेस को पिछली बार से दो अधिक सीटें मिली हैं और 1.44 प्रतिशत अधिक वोट।

यह राहुल गांधी (Rahul Gandhi) व मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) की सधी रणनीति का प्रतिफल है।

हालांकि, मतों में वृद्धि इतनी अप्रत्याशित भी नहीं कि माना जाए कि उसे आइएनडीआइए (बिहार में महागठबंधन) के घटक दलों के वोट एकमुश्त हस्तांतरित ही हो गए। दरअसल, सहयोगी दलों का अस्तित्व उसी जन-जमीन पर है, जो कभी कांग्रेस का आधार हुआ करता था।

राजद के माय (मुसलमान-यादव) समीकरण के मुसलमान कांग्रेस के परंपरागत मतदाता हैं।

वैसे ही वाम दलों की राजनीति को दमदार बनाने वाले गरीब व दलित भी। इन दोनों वर्गों के साथ सवर्ण समाज ने गुजरे दौर में कांग्रेस को जनाधार की एक पुख्ता जमीन मुहैया कराई थी।

बाद में लालू प्रसाद आदि ने उसमें सेंध लगाने की शुरुआत कर दी। मजबूत विकल्प देख सवर्ण राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर आकृष्ट हो गए और छीना-झपटी में मुसलमानों व दलितों के मत बिखरते रहे।

पसमांदा के मुद्दे मुसलमानों को लुभाने के लिए उछाले गए तो महादलित का वर्गीकरण कर वंचित वर्ग को आगे बढ़ाने का उपक्रम हुआ। कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान का दावा है कि इस बार इन वर्गों ने अपनी पुरानी प्रतिबद्धता का ख्याल रखा।

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