Sharad Purnia 2024: ध्रुव योग में 16 अक्टूबर को मनेगी शरद पूर्णिमा, चंद्रलोक से पृथ्वी पर आएंगी मां लक्ष्मी

शरद पूर्णिमा का पौराणिक महत्व आश्विन पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा देवों के चतुर्मास के शयनकाल का अंतिम चरण होता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, इसलिए सुख, सौभाग्य, आयु, आरोग्य और धन-संपदा की प्राप्ति के लिए इस पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।

इस रात को मां लक्ष्मी स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर प्रकट होती हैं।

इस रात जो मां लक्ष्मी को जो भी व्यक्ति पूजा करता हुआ दिखाई देता है।

मां उस पर कृपा बरसाती हैं। शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर, घी के दीपक जलाने से घर में सुख शांति बनी रहती है।

मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने व आर्थिक संकटों से छुटकारा पाने के लिए पूर्णिमा की रात्रि में घर में घी के 21 दीपक जलाकर श्रीसूक्त का 51 बार पाठ करना अति शुभ कारी माना जाता है।

समस्त सुखों की प्राप्ति के लिए शरद पूर्णिमा की रात्रि में लक्ष्मी-नारायण की आराधना एवं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से घरों में धन-वैभव बना होता है। ये भी पढ़ें- Dhanteras 2024: 29 या 30 अक्टूबर, कब है धनतेरस? नोट करें सही डेट एवं शुभ मुहूर्त ये भी पढ़ें- Kartik Maas 2024: करवा चौथ से लेकर दिवाली और छठ पूजा तक, नोट करें कार्तिक महीने के प्रमुख व्रत-त्योहार की तिथि ।

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