- होम >>
यूं ही नहीं करता कोई किसी पर शक... यह है दिमाग का केमिकल लोचा, क्या सिजोफ्रेनिया का इलाज है संभव?
- न्यूज़
- Friday | 24th May, 2024
ये बातें आइजीआइएमएस की वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. निष्का सिंह व मनोवैज्ञानिक परामर्शी प्रिया कुमारी ने गुरुवार को विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस की पूर्व संध्या पर कहीं।
आमजन को इस रोग से आगाह करने के लिए शुक्रवार को आइजीआइएमस समेत कई जगह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पटना में तेजी से बढ़ रही रोगियों की संख्या डा. निष्का सिंह के अनुसार, देश व प्रदेश में हर सौ लोगों में से एक स्त्री या पुरुष सिजोफ्रेनिया का रोगी होता है।
20 से 35 वर्ष के लाेग इसकी चपेट में अधिक आते हैं।
वहीं निजी मनोचिकित्सकों के अनुसार हाल के वर्षों में पटना जिले में सिजोफ्रेनिया के रोगी तेजी से बढ़े हैं।
यहां हर 10 में से एक व्यक्ति को सिजोफ्रेनिया की चपेट में आने का खतरा है।
रोग बढ़ने के तनाव भरी जिंदगी समेत कई कारक आपाधापी भरी जिंदगी से बढ़े तनाव और उसके कारण मस्तिष्क में डोपामाइन रसायन का स्तर बढ़ने या घटने को इस रोग का प्रमुख कारण माना जाता है।
इसके अलावा कुछ लोगों को पर्यावरणीय तो कुछ को आनुवंशिक कारणों से यह रोग होता है।
If You Like This Story, Support NYOOOZ
Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.






डिसक्लेमर :ऊपर व्यक्त विचार इंडिपेंडेंट NEWS कंट्रीब्यूटर के अपने हैं,
अगर आप का इस से कोई भी मतभेद हो तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखे।