`हाई कोर्ट निर्णय लेने की प्रक्रिया की जांच करता है; फैसले की नहीं`, पटना HC की सेवानिवृत्त प्राध्यापक की रिट पर टिप्पणी

इस दौरान कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इसके बाद अब आज (19 अगस्त को) हुई सुनवाई में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी है।  मामले में सुनील को विभागीय कार्यवाही के तहत दोषी पाते हुए अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया था।

उनकी अधिवक्ता महाश्वेता चटर्जी ने कहा कि सुनील के पक्ष में कई गवाहों ने साक्ष्य दिए हैं। चटर्जी ने दलील दी कि सुनील को गलत तरीके से फंसाया गया है।

सजा इतनी कठोर है कि इसे रद किया जाना चाहिए। याचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील प्रशांत प्रताप ने कहा कि 31 मार्च, 2016 को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के बारे में जानकारी विजिलेंस के पुलिस अधीक्षक द्वारा विभाग को मिली थी। सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए प्रशांत ने यह तर्क भी दिया कि यह साक्ष्य नहीं होने का मामला नहीं है।

याचिकाकर्ता निर्णय लेने की प्रक्रिया में किसी भी प्रक्रियागत अनियमितता को स्थापित करने में विफल रहा है। यह भी पढ़ें Anant Singh: मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत, पटना हाईकोर्ट ने 2 मामलों में किया बरी Agniveer Recruitment Case: पटना हाईकोर्ट पहुंचा बिना टेंडर अग्निवीर भर्ती का काम कराने का मामला ।

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