10 महीने में कोरोना से 23 हजार लोग हुए संक्रमित, 300 की जान जाने के बाद मिला टीका, फिर भी समझ नहीं रहे मोल, 3 दिन में 26 डोज हुए बर्बाद

संक्षेप:

10 महीने में कोरोना से 300 लोगों की मौत हो चुकी है। 23 हजार 300 लोग संक्रमित भी हुए और जब वैज्ञानिकों की मेहनत और रिसर्च से कोरोना वैक्सीन का टीका मिला तो उसे लगाने में फ्रंट लाइन वर्कर ही लापरवाही बरत रहे हैं। 

10 महीने में कोरोना से 300 लोगों की मौत हो चुकी है। 23 हजार 300 लोग संक्रमित भी हुए और जब वैज्ञानिकों की मेहनत और रिसर्च से कोरोना वैक्सीन का टीका मिला तो उसे लगाने में फ्रंट लाइन वर्कर ही लापरवाही बरत रहे हैं। पंजीयन कराने के बावजूद फ्रंट लाइन वर्कर्स, स्वास्थ्य कर्मी व नर्सिंग स्टॉफ के सेंटर में टीके लगवाने के लिए नहीं आने से तीन दिनों के भीतर ही 26 डोज खराब हो गए है, जिससे 26 की जान बचाई जा सकती थी। बुधवार को वैक्सीनेशन का तीसरा दिन था, बार बार फोन करने व मैसेज करने के बाद भी लोग टीका लगाने के लिए नहीं पहुंचे। ये सिलसिला पिछले तीन दिन से जारी है। इससे जिले के 4 सेंटरों में टीके के 26 डोज खराब हो गए। जिले में हर सेंटर में प्रति दिन 100-100 लोगों को वैक्सीन लगाई जानी है। वैक्सीन की एक वॉयल में 10 खुराक बनती है, इसलिए सेंटर में 90-95 लोगों के पहुंचने पर 9 वॉयल तो ठीक तरीके से इस्तेमाल हो जातेे हैं, पर आखिरी वॉयल में 10 से कम के आने पर बाकी खुराक हर दिन खराब हो जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति को 0.5 एमएल वैक्सीन लगनी है, यदि एक वॉयल खुलता है तो 4 घंटे के भीतर उसे लगाना जरूरी है।

हम लोगों को पूरा समय देते है, लेकिन आते नहीं है


मेडिकल कॉलेज के कोरोना वैक्सीनेशन के प्रभारी डॉ. अशोक अग्रवाल ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन देर शाम तक लोगों वैक्सीन लगाने के लिए आएंगे, इसके लिए हम रुकते है। बार बार फोन करने और मैसेज करने के बाद भी लोग नहीं आते है। इसके बाद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और रायपुर से परमिशन लेने के बाद बचे हुए लोगों वैक्सीन लगाते है। इसमें 2-4 टीका नुकसान होता है। बुधवार को 5 टीके खराब हुए हैं।

गुरुवार को 400 लोगों को टीके लगाने का लक्ष्य


गुरुवार को शहर के चार सेंटरों में 400 लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी। हर सेंटर को 100-100 फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाने का टारगेट दिया गया है। टीका वेस्ट न हो इसलिए सभी से टीके लगवाने की अपील की गई है।

दूसरे जिलों की तुलना में हमारे जिले में कम वेस्टेज

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"हर वैक्सीन में वेस्टेज फैक्टर रहता है, कोरोना वैक्सीन में भी 1.1 फीसदी वेस्टेज फैक्टर रहता है, लेकिन हमारे यहां दूसरे जिलों की तुलना में कम वैक्सीन वेस्ट हो रही है। लोगों को बार बार फोन करके और मैसेज करके बोल रहे हैं कि वे टीका लगाए, पर वे नहीं आ रहे है, सरकार निर्देश दिया हैं कि वेस्टेज फैक्टर जो भी हो, अगर पांच लोग यदि आ गए हैं तो एक वॉयल खोल दें। जिन्होंने वैक्सीनेशन लगाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है और वे तय दिन में टीके नहीं लगवा पाए हैं ,तो उन्हें दूसरे दिन टीके लगाने की कोशिश की जाएगी।``

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