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Jharkhand High Court: `सिर्फ मर्डर वेपन की बरामदगी के आधार पर...`, झारखंड हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी
- न्यूज़
- Wednesday | 5th June, 2024
हथियार बरामदगी को छोड़कर अन्य परिस्थितियों पर भी गौर किया जाना चाहिए और अपीलकर्ता को दोषी ठहराने के लिए कुछ कड़ी होनी चाहिए।
इस निर्देश के साथ अदालत ने प्रार्थी संजय कुजूर को बरी कर दिया। क्या है पूरा मामला? सिमडेगा की निचली अदालत ने हत्या के मामले में उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी।
इसके खिलाफ संजय कुजूर ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी।
याचिका में कहा गया है कि मृतक मुकेश कुजूर की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार जब वह खेत पर काम करने गई थी, तभी उसकी भाभी ने बताया कि उसके पति पर उसके भाई ने कुल्हाड़ी से हमला कर दिया है। हमले के बाद उसका पति बेहोशी की हालत में आंगन में पड़ा मिला।
वह तुरंत घर पहुंची और घायल पति को अस्पताल ले गई।
शुरुआत में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
बाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) को जोड़ा गया। प्रार्थी की ओर से दलील दी गई थी कि घटना के कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था।
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