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झारखंड: मानसून सत्र के आखिरी दिन सीएम सोरेन ने विपक्ष पर जमकर साधा निशाना, विपक्षियों पर लगाए एजेंडे की राजनीति करने के आरोप
- न्यूज़
- Friday | 2nd August, 2024
हमलोगों ने विगत पांच साल में जो किया, ये बीस क्या पचास वर्ष में नहीं कर सकते, इनका यही तरीका है, ऐसा आचरण करेंगे कि ना खाएंगे, ना खाने देंगे. सब हजम कर जाएंगे, अभी लोकसभा चुनाव में हल्का आइना दिखाया, विधानसभा में फुल लेंथ का आइना दिखाएंगे, खाली ये हल्ला करने आए, इस हल्ला गुल्ला में कोई कितना बोलेगा, लोग हल्ला करते रहेंगे, हाथी अपनी राह चलेगा, हम क्या बोलें, नियोजन नीति इनलोगों ने लटकाया, 27 प्रतिशत पिछड़ों का आरक्षण धराशायी कर दिया, आगे नहीं बढने दिया, सरना धर्म कोड, हमको धर्म कोड नहीं मिला, लंबोदर कुर्मी को आदिवासी बनाने चाहते, अभी तो हम रास्ता ढूंढ रहे, ये आदिवासी बनने का रास्ता ढूंढ रहे, इनको डेमोग्राफी दिखता, हिन्दू मुस्लिम करते, अभी बालू बेच रहे थे, इन्होंने पूरा देश बेच दिया, रेल बेच दिया, एयरपोर्ट बेच दिया, ये लोग वो नालायक लोग हैं जो घर के बूढ़ा बुर्जुग की जो संपत्ति होता है, सारा बेचकर खा गए, इनके व्यापारी दोस्त खा गए, अरबों माफ करते, किसानों का ऋण माफ नहीं करते, इनकी आंख में आंसू नहीं आता, हमने 50 हजार करोड़ ऋण माफ किया, हम ऋण माफी का दायरा बढाएंगे, बातें बहुत है, ये हमारी किताब दिखा रहे, अजीब हालत है, आप ये किताब लेकर जाइए, बेरोजगारी भत्ता प्रखंडों में मिल रहा, सभी प्रखंडों मे देंगे, हमलोगों ने मुख्यमंत्री मईयां योजना के तहत राशि देने का निर्णय किया, लगभग 50 लाख महिला को हर साल 12 हजार देंगे, अनुमान लगाइए कि हर घर में अगर तीन महिलाएं हो तो कितना जाएगा. आने वाले समय में सरकारी आई तो हर घर में एक लाख देंगे, ये अनुकंपा में रह जाएंगे, ये 20 हैं पांच नहीं आएंगे, ये डबल डिजिट में नहीं आएंगे, ये हिन्दू मुस्लिम के नाम पर वोट मांगते, अयोध्या मे जनता ने झटका दिया। देश में जो स्थिति है, ट्रेन एक दूसरे से ऐसे टकरा रहा जैसे मेन रोड में साइकिल, रिक्शा टकराते हैं, ये हालत है, मनरेगा और शिक्षा में पैसे घटाए, प्रधानमंत्री आवास का पैसे नहीं देते, हमने 30 लाख से ज्यादा को आवास देने का वादा किया है, सबको घर देंगे, इनके रीढ़ की हड्डी नहीं, इनके सबसे बड़े नेता ने कितने बड़े सवाल सदन में पूछे, एक भी सवाल नहीं किया, पूरे पांच साल सिर्फ राजनीतिक रोटी सेकी, आज जनता देख रही है, एक एक हिसाब लेगी, सरकार के एक एक निर्णय से इनके पसीने छूट रहे, स्कूल आफ एक्सीलेंस बनाया, प्राइवेट स्कूल के तर्ज पर, बेहतर टीचर दिए ताकि प्राइवेट स्कूलों की बराबरी करें, सावित्री बाई योजना से बच्चियों को जोड़ा, अनुदान प्राप्त स्कूलों की बच्चियों को अभी तक नहीं जोड़ा गया, उनकी संख्या भी बडे पैमाने पर, इन्हें भी साइकिल पोशाक देंगे, बहुत सारी चीजें हैं, इनकी करतूतें आप देखिए।
ये गुजरात में 25-30 साल हैं, एक भी परीक्षा नहीं किया, सारा पेपर लीक, एक भी नियुक्ति नहीं की, ये इनके सुशासन की परिभाषा। नेट की परीक्षा में लाखों का भविष्य बर्बाद, गुजरात, बिहार में हुआ, झारखंड का नाम लेते, अखबार भी इनकी जेब में, ये कोर्ट में भी, वीआरएस लेकर भाजपा ज्वाइन करते, अपने को संघी बोलते, देश में आदिवासी, दलित, पिछडा की स्थिति क्यों खराब। ये डेमोग्राफी की बात करते, रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो में किसके वजह से आबादी बढी, जो विषय लेकर ये आते, बांग्लादेशी की बात करते, ये आवाजाही हवा, पानी और जमीन से होता, तीनों में इनका मालिकाना हक, भाजपा का होता है, हम गंगा से जल निकाले तो एफआइआर हो जाता, हमारा एक सौ रुपया डालर में 85, 86, रुपया सर के बल पर है, रुपया का वैल्यू दो सौ करोड कर देंगे, पाकिस्तान से भी खराब, महंगाई रूकने का नाम नहीं ले रहा, गरीब मजदूर भूखे नंगे रहे हैं।
आम गरीब, मध्यमवर्गीय, छोटे उद्योग सारे डूब गए, खाली पीठ थपथपाते, विज्ञापन के माध्यम से, इनका आलेख लिखने वाला गिरोह है, उसी का नतीजा है कि ये लोकसभा मे कहते रहे भाजपा की सरकार है, आज एनडीए की सरकार कहते। बातें बहुत है, इनसे पूछिए कि काला चिट्ठा का क्या जवाब है, सरकारी और गैर मजरूआ, टाटा स्टील के आवास में कैसे आफिस बनाया।
हम नौकरी देने में लग गए, डेढ लाख को दिया। मुझे जेल में डाल दिया, हर प्रकार से, वादा के साथ करता हूं, मैं पांच माह बाहर रहता तो पांच लाख को नियुक्ति देता।
ऐसे वातावरण में बोलना छाती जलाने जैसा है।
कई संघों के लोगों ने हमें बताया कि ये उन्हें बुलाकर कहते हैं, धरना में चलते को कहते हैं, उन्होंने बताया है कि हेमंत सोरेन ही समस्या का निदान करेंगे। ये लोग प्रायोजित तरीके से करते, सहायक पुलिसकर्मी को आने वाले समय में समायोजित करेंगे, हमने हड़ताल खत्म कराया, ये हड़ताल कराते हैं, अग्निवीर जैसी योजना ये लाते हैं, इनके नेता दिग्भ्रमित करने वाली बातें कहते, अग्निवीर पर मजबूत निर्णय, अग्निवीर को हम किसी घटना में मृत्यु पर अनुदान देंगे, अनुकंपा पर नौकरी देंगे, ये नारा इंपोर्ट करके लाते, ये भटक गए हैं, अब ये एक्सपायरी हो चुके हैं, हर सदन में पचास प्रतिशत से ज्यादा विधायक घर में रहते, उसमें इनकी ही संख्या अधिक, बातें काफी है, हमलोग काम और लक्ष्य पर काम करते, इनके शोरशराबे से हम रास्ता से नहीं भटकने वाले, बिल्कुल मछली की आंख पर लक्ष्य है, इनको हम राजनीतिक अखाड़े में भी मुंहतोड़ जवाब देंगे, चाहें ये बाहर से कितने भी नेता लेकर आ जाएं। ।
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