सुप्रीम कोर्ट में ED ने महाधिवक्‍ता राजीव रंजन पर लगाए आरोप, कहा- जांच एजेंसी के खिलाफ साजिश रचने में रहे शामिल

उन्होंने अवैध पत्थर खनन मामले में प्रमुख गवाह रहे विजय हांसदा को ईडी की गवाही से मुकरने पर विवश किया और विजय हांसदा के माध्यम से ईडी के अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय दंड विधि की धारा व एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करवा दी। इतना ही नहीं, झारखंड पुलिस ने ईडी के अधिकारियों के विरुद्ध विजय हांसदा का बयान भी कोर्ट के सामने दर्ज करवा दिया।

इसमें महाधिवक्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ईडी ने कोर्ट में दावा किया है कि विजय हांसदा से संबंधित सभी कानूनी प्रक्रिया महाधिवक्ता की देखरेख में हुई है। ईडी के पास इससे संबंधित सबूत भी है। राज्य के सर्वोच्च विधि अधिकारी होने के नाते महाधिवक्ता ने हेमंत सोरेन का बचाव भी किया और उनकी पेशी और रिमांड के दौरान उनके पक्ष में दलीलें दीं। ईडी ने कोर्ट को बताया है कि महाधिवक्ता राज्य के सर्वोच्च कानून अधिकारी होते हैं।

इसके बावजूद उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पेशी व रिमांड के दौरान भी हेमंत सोरेन का बचाव किया और उनके लिए बहस की।

रांची में भूमि घोटाला मामले में हेमंत सोरेन 31 जनवरी को गिरफ्तार किए गए थे। विजय हांसदा की प्राथमिकी पर ही ईडी ने किया था अवैध पत्थर खनन का पर्दाफाश ईडी ने अपने हलफनामा में बताया है कि विजय हांसदा ने ही साहिबगंज में अवैध पत्थर खनन से संबंधित प्राथमिकी कराई थी।

इसी केस को आधार बनाकर ईडी ने ईसीआइआर किया और बड़ा खुलासा किया था। बाद में विजय हांसदा नाटकीय अंदाज में मुकर गया और ईडी के दो सहायक निदेशकों पर आइपीसी व एससी-एसटी एक्ट में प्राथमिकी दर्ज करवा दी। अवैध पत्थर खनन झारखंड का बड़ा घोटाला है, जिसने झारखंड की राजनीति में हड़कंप मचा दिया।

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सहयोगी पंकज मिश्रा को मुख्य षडयंत्रकर्ता के रूप में ईडी ने गिरफ्तार किया था।

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