पीएम मोदी ने राज्यसभा में बोल दिए ऐसे शब्द, हटाना पड़ा सदन के रिकॉर्ड से

संक्षेप:

  • पीएम मोदी की टिप्पणी को राज्‍यसभा की कार्यवाही रिकॉर्ड से हटाया गया
  • पीएम मोदी ने किया था बीके हरिप्रसाद का ज़िक्र
  • कांग्रेस ने जताई थी आपत्ति

गुरुवार को राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए हुए चुनाव में NDA प्रत्याशी हरिवंश नारायण सिंह के जीत जाने के बाद संसद में की गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को सदन के रिकॉर्ड से हटाया गया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी बीके हरिप्रसाद का ज़िक्र किया था.

संसद के उच्च सदन के दूसरे सर्वोच्च पद के लिए हुए चुनाव में NDA की जीत होने के बाद दिए अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश नारायण सिंह को बधाई दी, और कहा - चुनाव `दो हरि` के बीच था. उन्होंने इसी भाषण के दौरान ऐसी टिप्पणी भी की, जिसे कांग्रेस सदस्यों ने बीके हरिप्रसाद का अपमान करार दिया, और नाराज़गी जताई.

यह पहला मौका है जब पीएम मोदी की किसी टिप्पणी को संसद की कार्यवाही से हटाया गया है। यह दुर्लभ अवसर है, परन्तु यह पहला मौका नहीं है, जब प्रधानमंत्री की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड में से हटाया गया हो. वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह तथा विपक्ष के नेता अरुण जेटली के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी, जिसके बाद दोनों ही नेताओं के कहे कुछ शब्दों को रिकॉर्ड में से हटाया गया था.

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वैसे, राज्यसभा में सरकार की इस जीत को विपक्षी एकजुटता के लिए करारा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 2019 के आम चुनाव में BJP से टक्कर लेने के लिए अधिकतर विपक्षी दल एक साथ आने की कवायद में लगे हुए हैं. गुरुवार को विपक्ष के कई सदस्य सदन में मौजूद ही नहीं थे, जबकि दूसरी ओर, BJP ने सहयोगी दलों से वक्त रहते बात कर अपनी जीत सुनिश्चित कर ली. यहां तक कि सर्जरी की वजह से लम्बे समय तक सदन से गैरहाज़िर रहे केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली भी ऑपरेशन के बाद पहली बार गुरुवार को वोट डालने संसद पहुंचे.

गौरतलब है कि विपक्ष में फूट का फायदा उठाकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार बी.के. हरिप्रसाद को आसानी से हरा दिया. अनुभवी पत्रकार और जनता दल युनाइटेड (जद-यू) के सदस्य हरिवंश को 125 जबकि हरिप्रसाद को 105 वोट मिले. राज्यसभा में सभापति को छोड़कर वर्तमान में 244 सदस्य हैं, लेकिन सदन में केवल 230 सदस्य ही उपस्थित थे. आम आदमी पार्टी (आप) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्य मतदान के दौरान मौजूद नहीं थे.

सत्तारूढ़ उम्मीदवार को यह आसान जीत बीजू जनता दल (बीजद) और तेलंगाना राष्ट्र समिति के समर्थन से मिली. दोनों पार्टियों का भाजपा से क्रमश: ओडिशा और तेलंगाना में मुकाबला रहता है लेकिन दिल्ली में उन्होंने भाजपा की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया. उम्मीद के मुताबिक अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम(अन्नाद्रमुक) के 13 सांसदों ने भी राजग के उम्मीवार का समर्थन किया. सदन में बीजद और टीआरएस के क्रमश: 9 और 6 सदस्य हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश के लिए समर्थन जुटाने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव से बातचीत की थी. आम आदमी पार्टी (आप) के तीन सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. आप के नेताओं ने कहा कि कांग्रेस ने उनसे संपर्क नहीं किया. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के भी दो सांसद सदन से अनुपस्थित रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को बधाई दी और कहा, "मैं राज्यसभा के उपसभापति के रूप में चयनित होने के लिए हरिवंशजी को बधाई देता हूं."

मौजूदा मानसून सत्र में पहली बार भाग लेने वाले जेटली ने भी हरिवंश को बधाई दी और कहा कि वह आश्वस्त हैं कि हरिवंश पद की गरिमा को बनाए रखेंगे. पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सभी नेताओं ने नए उपसभापति को शुभकामनाएं दीं. नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने आशा जताई कि हरिवंश अपनी भूमिका बिना किसी भेदभाव के निभाएंगे और जाति, धर्म से परे होकर समाज के सभी धड़े के लिए काम करेंगे. उन्होंने आशा जताई कि सदन के संचालन में उनके पत्रकारिता के अनुभव से लाभ मिलेगा. समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, शिवसेना के संजय राऊत और अन्य पार्टियों के सदस्यों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दी.

हरिवंश ने सदस्यों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वह सदन की कार्यवाही बिना भेदभाव के चलाएंगे. उन्होंने कहा, "अब, मैं किसी भी पार्टी से संबद्ध नहीं हूं." उन्होंने सदन को सुचारु रूप से चलाने के लिए सदस्यों का सहयोग भी मांगा. उन्होंने कहा कि सत्ता के गलियारों (कॉरिडोर्स ऑफ पावर) तक पहुंचना उनके लिए गर्व का विषय है. साथ ही उन्होंने देश के विकास के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जताई. हरिवंश के भाषण समाप्त होने के बाद, राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू ने उन्हें सदन की कार्यवाही चलाने का निमंत्रण दिया.

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