मेरठ: रूस में जोगेंद्र पाल ने फहराया भारत का परचम

  • Pinky
  • Friday | 12th January, 2018
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संक्षेप:

  • किसान परिवार के है जोगेंद्र पाल
  • दो चोटियों पर लहरा चुके है तिंरगा  
  • ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का दे रहे संदेश

मेरठ - मन में इच्छा हो तो मुश्किल काम भी आसान होते हो जाते हैं। यूपी के सहारनपुर जिले के किसान परिवार में जन्मे जोगेंद्र पाल विश्व की सबसे ऊंची चोटियों को फतेह करने निकले हैं। जोगेंद्र पाल अब तक दो चोटियों पर तिरंगा लहरा चुके हैं। इनमें से एक रूस की एलब्रुस चोटी है जबकि दूसरी साउथ अफ्रीका की 8595 फीट ऊंची किलिमंजारो चोटी है। जोगेंद्र अपने अभियान से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं का संदेश विश्व में फैला रहा है।

जोगेंद्र का जन्म सहारनपुर के एक छोटे से गांव में हुआ है। वह बेहद ही गरीब परिवार से है। पिता पाला राम गांव में ही खेतीहर मजदूर है। दो बड़े भाई मंजीत और परमजीत भी गांव में ही खेतीहर मजदूर के रूप में काम करते है। जोगेंद्र पाल ने बताया कि उसने पर्वतारोही बनने की शुरूआत वर्ष 2015 में की थी। एक दिन टीवी पर उन्होंने महिला पर्वतारोही बछेन्द्री पाल को देखा, तब से कुछ ऐसा करने की सोची जिससे वह अपने आपको दूसरों से अलग कर सके।

इसके बाद उन्होंने हिमाचल के मनाली में स्थित अटल बिहारी वाजपेयी माउंट ट्रेनिंग सेंटर दो महीने की ट्रेनिंग प्राप्त की। ट्रेनिंग लेने के बाद वह अपने अभियान को पूरा करने में जुट गया। ट्रेनिंग के दौरान जोगेंद्र ने हजार फीट की ऊंचाई पर चढ़ने में कामयाबी हासिल की। जोगेंद्र ने रॉक क्लाइबिंग, स्नो क्रापटिंग और नदी क्रासिंग के अलावा ग्लेशियर पार करने का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। जोगेंद्र ने रूस की सबसे ऊंची चोटी एलब्रेश सितंबर में फतेह की। अब उसका लक्ष्य ​सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा लहराना है।

जोगेंद्र पाल के मुताबिक, अभियान के दौरान शुरू से आखिर तक चुनौतियों को सामना करना पड़ता है। मौसम हर समय चुनौती देता है, कभी तूफान का सामना करना पड़ता है तो कभी बारिश का। पहाड़ टूटने का डर हर समय बना रहता है। स्नोफाल तो लगातार परेशान करता है। चोटी पर पहुंचने के बाद गिरने का भी डर रहता है। माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक तापमान गिर जाता है। सांस लेना भी मुश्किल होता है।

जोगेंद्र पाल का कहना है कि युवाओं को लड़कियों के प्रति अपनी सोच और नजरिया बदलना होगा। युवाओं को अपनी ताकत देश हित में लगानी चाहिए, उन्हें यह साबित करना होगा कि युवा शक्ति ही विकास की धुरी है। वह अपने अभियान के जरिए बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं का संदेश दे रहे हैं। जब वह चोटी पर पहुंच जाते हैं तो वहां तिरंगे के साथ-साथ अपना यह संदेश लिखा झंडा भी फहराते हैं।

जोगेंद्र की मानें तो उसे अपने अभियान को पूरा करने में आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उसे कोई स्पोंसर भी नहीं मिला है। पाल सेवा संघ ने एक बार 70 हजार रूपए की आर्थिक मदद की थी। अभियान के दौरान एक बार पैसों की कमी पड़ी तब उसके हरियाणा के एक दोस्त विरेंद्र ने मदद की।

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