ताजमहल और आगरा किले के लिए खतरा बन रही है यमुना, संसद में सरकार ने दी जानकारी, यमुना में शुरु होंगे ये पांच काम

संक्षेप:

ताजमहल और आगरा किले पर मंडरा रहा है खतरा

सुंदरता को बढ़ाने वाली यमुना नदी ही बन रही है खतरा

यमुना नदी में कराने होंगे 5 काम

दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल और आगरा किले पर खतरा मंडरा रहा है और ये खतरा किसी और से नहीं बल्कि यमुना नदी की वजह से पनप रहा है... हालाकि फतेहपुर सीकरी इस खतरे से बाहर बताई जा रही है.. इस बात की जानकारी बीते 8 फरवरी को सरकार ने संसद में ये जानकारी दी थी...

 

सरकार ने बताया है कि ताजमहल समेत सभी तीन इमारतों को बचाने के लिए यमुना नदी में 5 काम शुरु कराने होंगे... जिसमे यमुना नदी की डिसिल्टिंग भी शामिल है... जिसपर दिल्ली के प्रोफेसर बीआर सिंह का कहना है कि गोल्डी काइरोनोमस दलदली जगह में पैदा होता है... ताजमहल यमुना के किनारे बना हुआ है... जैसे ही गर्मियों में पानी कम होता है और यमुना में कीचड़ और काई जैसी दलदल बनने लगती है तो गोल्डी काइरोनोमस तेजी से पनपने लगता है... ये काई के रंग जैसा ही हरे रंग का होता है...

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभग की विज्ञान शाक्षा के मुताबिक ताजमहल, आगरा किला को इस खतरे से बचाने के लिए यमुना नदी में खासी गहराई तक जमा गाद को बाहर निकालना होगा... नदी के किनारे पर उगी खरपतवार को हटाना होगा... खरपतवार की पैदावार पर रोक लगानी होगी... यमुना नदी में पानी छोड़ना होगा... लगातार पानी के बहाव को बनाए रखना होगा... इसके साथ ही स्मारकों की बेहतर सफाई और संरक्षण पर भी खास ध्यान देना होगा...

 

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी यूपीपीसीबी की साल 2018 की सलाना रिपोर्ट ने खुलासा करते हुए कहा था कि यमुना सबसे ज्यादा गंदी ताजमहल के पास ही है... जिसकी एक बड़ी वजह पानी की कमी है... यहां यमुना ज्यादातर दलदली हालत में रहती है.... जिसके चलते ये कीड़ा पनपता है...

 

प्रोफेसर बीआर सिंह बताते हैं कि हरे रंग के इस कीड़े गोल्डी काइरोनोमस को दूसरे रंग बहुत प्रभावित करते हैं. ताजमहल की दीवारों पर रंग-बिरंगे नक्कशी वाले फूल बने हुए हैं. फूलों के रंग ही गोल्डी काइरोनोमस कसे अपनी ओर आकर्षित करते हैं. जब गोल्डी काइरोनोमस इन फूल पर बैठता है तो वहां ये मल त्याग भी करता है. इसके मल का रंग भी हरा होता है. ये ही मल ताज की दीवारों पर चिपक रहा है और उसे हरे रंग का बना रहा है.

 

वहीं दूसरी तरफ ताज के किनारे बहने वाली यमुना नदी में हो रहा प्रदूषण और जंगलों की कटाई का भी असर ताज पर लगातार पड़ रहा है...  नदी के प्रदूषित पानी से ताज की नींव कमज़ोर हो रही है... कुछ साल पहले इसके गुंबद और चार मीनारों में दरार देखी गई थी... 358 साल पुराने ताजमहल की सड़ती बुनियाद को दुरुस्त नहीं किया गया तो लाखों सैलानियों को अपनी ओर खींचने वाली ये इमारत मटियामेट हो जाएगी...

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