किडनी कांड के मास्टरमाइंड सहित 4 गिरफ्तार, 33 लाख रुपये भी बरामद

संक्षेप:

  • किडनी ट्रांसप्लांट का मामला
  • पुलिस को हाथ लगी बड़ी सफलता 
  • 4 लोगों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

 

 

देहरादून: बहुचर्चित किडनी ट्रांसप्लांट मामले में दून पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। बड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस ने इस धंधे के मास्टरमाइंड डॉक्टर अमित को धर दबोचा है। साथ ही फरार चल रहे उसके भार्इ जीवन समेत कुल 4 लोगों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इन चारों को हरियाणा के पंचकुला से गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, मुख्य आरोपी डॉक्टर अमित, जीवन और सरला को हरियाणा के पंचकूला से गिरफ्तार किया गया है। मामले में आरोपी ड्राइवर बिल्लू को रायवाला से हिरासत में लिया गया। पुलिस ने आरोपियों से 33 लाख 71 हजार रुपये भी बरामद हैं। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को एसएसपी कार्यालय देहरादून लाया गया है।

अमित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस कई स्थानों पर दबिश दे रही थी आखिरकार पुलिस अमित को गिरफ्तार करने में कामयाब हो गर्इ है। बता दें कि अमित देहरादून लाल तप्पड़ स्थित गंगोत्री चेरिटेबल अस्पताल में किडनी रैकेट का मास्टरमाइंड है। वो अपने बेटे अक्षय और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर ये रैकेट चलाता था।

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अमित मूल रूप से मुंबई का रहने वाला है। इसने किडनी ट्रांसप्लांट के इस धंधे को कई राज्यों में फैलाया हुआ था। पिछले 24 सालों से ये धंधा कर रहा अमित अबतक 500 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। देहरादून में ही वो 3 महीने में 50 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। यहां के गरीब और मजबूर लोगों की किडनी निकालकर उनको अपने कस्टमर्स को 25 से 50 लाख में बेचा करता था। इसके ज्यादातर ग्राहक विदेशी होते थे, खासकर खाड़ी देशों के शेख।

पुलिस जांच में सामने आया है कि अमित के पास आयुर्वेद की डिग्री थी और वो इससे किडनी ट्रांसप्लाट का काम किया करता था। अमित, उसके अलावा अक्षय, हॉस्पिटल संचालक राजीव चौधरी समेत 7 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। किडनी खरीदने के मामले में दून पुलिस को 4 ओमान नागरिकों की भी तलाश है, इन्होंने 28 अगस्त से 10 सितंबर के बीच यहां आकर किडनी ट्रांसप्लांट करायी थी।

वहीं, दो दिन पहले नेचर विला स्थित अमित और राजीव के ठिकानों की तलाशी में पुलिस को काफी सबूत भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि इसी नेचर विला रिसॉर्ट में आरोपी डॉक्टर और उसके विदेशी क्लाइंट रुके थे। तलाशी के दौरान उत्तरांचल डेंटल कॉलेज और गंगोत्री चैरिटेबिल अस्पताल के बीच हुए लीज एग्रीमेंट के दस्तावेज, तीन बैंक अकाउंट समेत अमित पर दर्ज आधा दर्जन से अधिक मुकदमों से संबंधित कागजात मिले हैं।

इसके साथ ही राजीव के घर से तीन अलग-अलग बैंकों की पासबुक, अस्पताल में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की छाया प्रतियां, अस्पताल के प्रचार-प्रसार के लिए बनवाये गए पंपलेट मिले हैं।

घर से मिले कागजातों से पता चला है कि राजीव ही गंगोत्री चैरिटेबल अस्पताल का संचालक था। उसकी बीवी अनुपमा उसकी गैरमौजूदगी में अस्पताल का पूरा कामकाज देखती थी। जांच पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि गंगोत्री चैरिटेबल अस्पताल का लीज एग्रीमेंट सेंचुरी वेलनेस अस्पताल के नाम से हुआ था, लेकिन अस्पताल के बोर्ड पर इस नाम का कहीं भी जिक्र नहीं है।

बता दें कि पुलिस ने हाल ही में देहरादून के लाल तप्पड़ में गंगोत्री चैरिटेबल हॉस्पिटल में चल रहे इस रैकेट का भंडाफोड़ किया। ये किडनी रैकेट लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी किडनी निकाल लेता थे और फिर साढ़े तीन से चार लाख में ये किडनी बेची जाती थी। यहां 3 महीनों के अंदर ही 50 से ज्यादा लोगों की किडनी ट्रांसप्लांट करने की बात सामने आई थी।

इससे पहले आरोपियों के खिसाफ लुक आउट नोटिस जारी होने के साथ-साथ पुलिस ने इन सभी व्यक्तियों के नौ बैंक खातों को सीज कर दिया था। इन खातों में कुल मिलाकर 74,50,000 रुपये की रकम जमा थी। इनमें पांच बैंक खाते अकेले डॉ अमित कुमार के हैं, जबकि डॉ अक्षय कुमार का एक खाता और अनुपमा के तीन बैंक खाते हैं। इन बैंकों की शाखाएं मुंबई और गुरुग्राम में हैं।

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