देहरादून IMA में पासिंग आउट परेड, इतने कैडेट्स बने सेना में अफसर

संक्षेप:

  • आईएमए में पासिंग आउट परेड
  • 347 नए कैडट्स बने सेना में अफसर
  • दुश्मन ने की नापाक हरकत तो फिर होगी सर्जिकल स्ट्राइक: अन्बु

देहरादून: देहरादून के भारतीय सैन्य अकादमी में हुए पासिंग आउट परेड सेरेमनी में 427 कैडेट्स पासआउट होकर अफसर बन गए हैं. परेड के बाद आज भारतीय सेना को 347 नए अफसर मिले. इसके साथ ही भारत ने अन्य देशों को 80 अफसर दिये.

इस एतिहासिक घड़ी का गवाह बनने के लिए कैडट्स के परिजन भी दूर दराज से IMA पहुंचे थे. पीओपी के दौरान कैडट्स और उनके परिजनों में खासा उत्साह देखने को मिला.

पासआउट अफसरों ने IMA के प्रशिक्षण को चुनौतीपूर्ण बताया. विदेशी कैडेट्स ने भारत का धन्यवाद करते हुए कहा कि वो आभारी हैं कि उन्हें यहां प्रशिक्षण देकर इतना काबिल बनाया गया कि वो अब अपने देश की सेवा कर सकते हैं. भूटान के कैडेट श्रृंग टेसी ने बताया कि शुरुआती दौर में आइएमए में ट्रेनिंग के दौरान काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन बाद में ट्रेनिंग मुश्किल नहीं बल्कि चुनौती से भरी लगने लगी.

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भूटान के कैडेट टेसी ने बताया कि उन्हें पासआउट होने की बेहद खुशी है, बस दुख इस बात का है कि उन्हें अकादमी छोड़नी पड़ेगी. इस मौके पर श्रृंग टेसी के पिता ने बताया कि उनका सपना था कि वो अपने बेटे को सेना का अफसर बनते देखें, जो आज साकार हो गया है. भारत को प्रशिक्षण देने के लिए बहुत-बहुत आभार.

आज पासआउट हुए सभी कैडेट्स के परिजनों का कहना है कि यह क्षण उन्हें जिंदगीभर याद रहेगा. बच्चों की मेहनत को सफल होते हुए देखना बेहद सुखद आनंद देता है. खासकर जब परिवार के बेटे देश की रक्षा करने के लिए प्रण लेते है वो गौरवान्वित करने वाला क्षण होता है.

वहीं IMA पासिंग आउट परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर सलामी लेने पहुंचे उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अन्बू ने कहा कि हम पड़ोसी देश को सर्जिकल स्ट्राइक कर मुंह तोड़ जवाब दे चुके हैं. लेकिन जरूरत पड़ी और सीमा पार से कोई नापाक हरकत की जाती है तो हम फिर पहले की तरह दुश्मन को नेस्तनाबूद करते हुए फिर से सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं.

उप सेना प्रमुख देवराज अन्बु ने कहा कि, सेना में महिलाओं की भूमिका को जल्द ही विस्तार किया जाएगा. उन्हें सेना के फ्रंटलाइन कॉम्बैट के रोल में भी आगे आने वाले समय में देखा जा सकेगा, इस प्रकिया पर कार्य चल रहा है. सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने पर भी मंथन किया जा रहा है, ताकि उनकी भूमिका का सेना में विस्तार हो सके और वो समय आने पर युद्ध भूमि पर भी अपना जौहर दिखा सकें.

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