उत्तराखंड: पीसीएस परीक्षा का गणित पैटर्न युवाओं के लिए हो रहा भारी साबित, पेपर हटाने की कर रहे मांग

संक्षेप:

  • पीसीएस परीक्षा का गणित पैटर्न युवाओं के लिए हो रहा भारी साबित
  • गणित का सातवां पेपर है काफी मुश्किल 
  • सिविल सेवा और यूपी पीसीएस में नहीं है गणित की मुश्किल

देहरादून। उत्तराखंड में लाखों युवाओं के सपने पर पीसीएस परीक्षा का गणित पैटर्न भारी साबित हो रहा है। अब तक प्रदेश में पांच पीसीएस परीक्षाएं हुई हैं, जिनमें से पीसीएस-2016 परीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई है। अब युवा गणित का पेपर हटाने की मांग कर रहे हैं।

दरअसल, देहरादून निवासी युवक ने आरटीआई के तहत उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से पीसीएस-2016 में चुने गए युवाओं की योग्यता की जानकारी मांगी। जानकारी चौंकाने वाली है। पीसीएस मुख्य परीक्षा में कुल 190 युवाओं ने मुख्य परीक्षा का पड़ाव पार किया। इनमें से 173 युवा ऐसे हैं, जो कि बीटेक, बीई या बीएससी यानी मैथ्स बैकग्राउंड वाले थे। केवल 17 युवा ही ऐसे थे, जो कि बीए पास थे।

गणित का सातवां पेपर है काफी मुश्किल 

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इसके बाद जब अंतिम चयन परिणाम आया तो प्रदेश में 57 पीसीएस अधिकारी चुने गए। इनमें से केवल पांच ही बीए वाले थे बाकी 52 इंजीनियरिंग, साइंस बैकग्राउंड वाले थे। सालों से पीसीएस की तैयारी कर रहे युवाओं का कहना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि उत्तराखंड पीसीएस का जो पैटर्न है, उसमें गणित का सातवां पेपर काफी मुश्किल है। उनका कहना है कि इस पेपर की वजह से ही पीसीएस बनने का सपना बीए पास युवाओं के हाथ से निकल रहा है। आपको बता दें कि इन दिनों पीसीएस परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए 30 अगस्त तक आवेदन कर सकते हैं।

सिविल सेवा और यूपी पीसीएस में नहीं है गणित की मुश्किल

संघ लोक सेवा आयोग की ओर से होने वाले सिविल सेवा परीक्षा और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से होने वाले पीसीएस परीक्षा में गणित का मुद्दा नहीं है। सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में कुल नौ पेपर होते हैं, जिनमें से आठवां और नौंवा पेपर वैकल्पिक है। वहीं, यूपी पीसीएस में कुल आठ पेपर होते हैं, जिनमें से सातवां और आठवां पेपर वैकल्पिक होता है।

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