ड्राइविंग लाइसेंस के लिए, टेस्ट ड्राइव की हुई अनिवार्यता

संक्षेप:

  • बिना टेस्ट ड्राइविंग के नहीं मिलेगा ड्राइविंग लाइसेंस 
  • मुजफ्फरनगर समेत आठ जनपदों में ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाए गए
  • 15 जून से जिले में टेस्टिंग व्यवस्था लागू कर दी जाएगी

मुजफ्फरनगर। सूबे में होने वाली सड़क दुर्घटनाएं और उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए शासन द्वारा अब ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। जिसके चलते जनपद में अब बिना टेस्ट ड्राइविंग के किसी को भी ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत नहीं किया जाएगा। शासन के आदेश पर जनपद के आईटीआई परिसर में ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित किया गया है, जहां बनाए गए ट्रैक पर वाहन चलाकर दिखाने के बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर जारी किया जाएगा।

मुजफ्फरनगर समेत आठ जनपदों में ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाए गए

सूबे के मुजफ्फरनगर समेत आठ जनपदों में ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाए गए हैं, जहां ड्राइविंग के लिए ट्रेनिंग ट्रैक भी बनाए गए हैं। ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए अब आवेदक को ऑनलाइन स्लॉट लेने के बाद मेरठ रोड स्थित आईटीआई परिसर में बनाए गए डीटीआई में अफसरों के सामने अपनी वाहन चलाने की दक्षता का परिचय देना होगा। इसमें सफल होने के बाद ही आवेदक को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाएगा। 

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15 जून से जिले में टेस्टिंग व्यवस्था लागू कर दी जाएगी

एआरटीओ विनीत मिश्रा ने बताया कि जनपद में मेरठ रोड स्थित आईटीआई परिसर में डीटीआई और टेस्ट ट्रैक बनाए गए हैं। आगामी 15 जून से जिले में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। 

उपयुक्त मापदंड हम सभी की सुरक्षा हेतु ही लिए गए है। भारत के आज तक के युद्धों में जितने सैनिक शहीद नहीं हुए, उससे ज्यादा लोग सड़कों पर दुर्घटना में एक साल में मारे जाते हैं, इसलिए चिंतित सुप्रीम कोर्ट को यहां तक कहना पड़ा कि देश में इतने लोग सीमा पर या आतंकी हमले में नहीं मरते जितने सडकों पर गड्ढों की वजह से मर जाते हैं। पिछले एक दशक में ही भारत में लगभग 14 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए हैं।

इन मौतों का दुष्प्रभाव तो मृतकों के परिवार पर पड़ना स्वाभाविक ही है साथ ही देश की प्रगति भी इन हादसों से प्रभावित होती है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार भी वर्ष 2018 में वर्ष 2017 की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 0.46 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

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