पंचायत चुनाव की रंजिश में हुई इकबाल प्रधान की हत्या, पांच को उम्रकैद, एक बरी

संक्षेप:

  • हत्याकांड के फैसले को लेकर गांव से तमाम लोग दीवानी में मौजूद रहे।
  • पांचों आरोपियों को दीवानी हवालात से जेल में दाखिल कर दिया गया।
  • मामले में एक आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया गया है।

अलीगढ़- छर्रा क्षेत्र के गांव सतरापुर में पंचायत चुनाव की रंजिश में हुए इकबाल प्रधान की हत्या में पांच आरोपियों को शुक्रवार को उम्रकैद की सजा व जुर्माने से दंडित किया गया है। इस बहुचर्चित कांड के फैसले को लेकर गांव से तमाम लोग दीवानी में मौजूद रहे और फैसला सुनते ही सभी के चेहरों पर मायूसी देखने को मिली। बाद में भीड़ के बीच से पांचों आरोपियों को दीवानी हवालात और वहां से जेल ले जाकर दाखिल कर दिया गया। यह फैसला एडीजे-12 सिद्धार्थ सिंह की अदालत से सुनाया गया है और मामले में एक आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया गया है।

अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी प्रमेंद्र जैन के अनुसार, वादी शकील अहमद की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था कि 27 जुलाई 2016 की रात दस बजे उनके ग्राम प्रधान पिता इकबाल घर के दरवाजे पर बैठे थे। तभी नामजद हमलावरों ने फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी। मुकदमे के अनुसार प्रधानी के चुनाव में पिता के सामने हारे हुए प्रत्याशी छोटे खां, उनके परिवार के मैराज, ममुआ, दिलशाद उर्फ दिल्ला, मैनुद्दीन व रियासत को नामजद किया गया था। आरोप था कि ये लोग चुनावी रंजिश रखते थे। इसी रंजिश के चलते उनकी हत्या की गई।

पुलिस की विवेचना के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। सत्र परीक्षण के दौरान सभी पक्षों की ओर से दलील व साक्ष्य पेश किए गए। बचाव पक्ष की ओर से नामजदगी झूठी करार देने का पूरा प्रयास किया गया। मगर न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ठोस पैरवी, मजबूत साक्ष्य व परिवार की ठोस गवाही के आधार पर मैराज को छोड़कर अन्य सभी पांच आरोपी छोटे खां, ममुआ, दिलशाद उर्फ दिल्ला, मैनुद्दीन व रियासत को बृहस्पतिवार को दोषी करार दिया गया।

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शुक्रवार को सजा की तारीख नियत थी। दोपहर में सभी आरोपी न्यायालय में तलब किए गए। जहां करीब दो बजे पांचों आरोपियों को उम्रकैद व 15-15 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया।

प्रधान जैसे व्यक्ति की हत्या में मृत्युदंड हो : अभियोजन पक्ष

अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एडीजीसी प्रमेंद्र जैन ने सजा पर बहस के दौरान आरोपियों को मृत्युदंड की सजा की वकालत की। अभियोजन की दलील थी कि जब यह लोग प्रधान जैसे व्यक्ति की घर के दरवाजे पर सनसनीखेज वारदात कर सकते हैं तो इन्हें मृत्यु दंड की सजा सुनाई जाए। न्यायालय ने इसे जघन्यतम अपराध मानते हुए उम्रकैद से दंडित किया है।

परिवार की गवाही बनी सजा का मजबूत आधार

इस मुकदमे में गवाही व बहस के दौरान परिवार के सभी सदस्यों की ओर से आरोपियों को हथियारों सहित रोशनी में फायरिंग करते हुए पहचाना, जिसे बचाव पक्ष ने प्रायोजित गवाही करार देने का प्रयास किया। मगर अदालत ने माना कि जब तहरीर लिखने से लेकर गवाही देने तक के समय में सभी सदस्य एक स्वर में एक जैसा बयान दे रहे हैं और उसमें कोई भिन्नता नहीं तो यह गवाही प्रायोजित नहीं हो सकती।

आरोपियों ने अपनी लोकेशन अलग-अलग बताने का किया प्रयास

बचाव पक्ष ने कुछ आरोपियों की लोकेशन अलग-अलग बताने का प्रयास किया। किसी ने खुद को अलीगढ़ तो किसी को दिल्ली बताया। छोटे खां ने बताया कि प्रधानी लड़ने की खुन्नस में यह नामजदगी गलत की गई है। मगर उनकी कोई दलील काम नहीं आई।

- मेरे पिता की हत्या के आरोपियों को न्यायालय ने सजा सुनाई है। उसके लिए हम आभारी हैं। न्यायालय से हमें न्याय मिला है। इसकी ही हमें उम्मीद थी।-कमाल, इकबाल के पुत्र

तिहरे हत्याकांड में जेल में हैं दो बेटे, दोनों गुट रहेंगे अलग-अलग

इस हत्याकांड के वादी यानि मृत इकबाल प्रधान का बड़ा बेटा शकील व मुख्य गवाह खालिद इन दिनों जेल में हैं। वे गांव में इकबाल परिवार के ही तीन लोगों की हत्या के मामले में जेल में हैं। बता दें कि इकबाल की हत्या के बाद कुछ ऐसे लोगों को फंसाने के इरादे से यह हत्याकांड किया गया था, जो इकबाल की हत्या में नामजद नहीं हो पाए थे। इसी क्रम में साजिश रचकर अपने ही परिवार की एक महिला, उसके बेटे व बेटी की हत्या की गई, जिसमें इकबाल हत्याकांड के आरोपी पक्ष को ही नामजद किया गया। मगर विवेचना में नामजदगी झूठी पाई गई और इकबाल के दो बेटे खालिद व शकील मुख्य आरोपी पाए गए। कुछ अन्य सहयोगी बने, जो अभी जेल में हैं। अब इकबाल हत्याकांड का आरोपी पक्ष भी जेल पहुंच गया है। इसलिए दोनों को अलग-अलग रखने का फैसला हुआ है ताकि आमना-सामना न हो सके।

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