रमेश पोखरियाल निशंक बनाए गए मानव संसाधन विकास मंत्री, शिक्षक से शिक्षा मंत्री तक, ये है उनका सियासी सफऱ

संक्षेप:

  • हरिद्वार के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को मानव संसाधन विकास मंत्रालय सौंपा गया है.
  • ख़ास बात यह है कि रमेश पोखरियाल निशंक अपने जीवन के शुरुआती सालों में शिशु मंदिर में शिक्षक भी रह चुके हैं.
  • उत्तराखंड के इतिहास में आज तक किसी भी मंत्री को इतना महत्वपूर्ण मंत्रालय नहीं मिला है.

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड पर बड़ा भरोसा जताया है. हरिद्वार के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को मानव संसाधन विकास मंत्रालय सौंपा गया है. ख़ास बात यह है कि रमेश पोखरियाल निशंक अपने जीवन के शुरुआती सालों में शिशु मंदिर में शिक्षक भी रह चुके हैं. उत्तराखंड के इतिहास में आज तक किसी भी मंत्री को इतना महत्वपूर्ण मंत्रालय नहीं मिला है. हालांकि इससे पहले बीसी खंडूड़ी, हरीश रावत और सतपाल महाराज भी केंद्र में मंत्री रह चुके हैं और हरीश रावत तो कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय जैसा प्रभावी पद किसी को नहीं मिला.

उत्तराखंड के शिक्षण संस्थानों की उम्मीदें जगीं

निशंक के मानव संसाधन विकास मंत्री बनने से उत्तराखण्ड की उम्मीदें बढ़ गई हैं. पिछले सालों में उत्तराखण्ड में उच्च शिक्षा की बड़ी दुर्दशा देखने को मिली थी लेकिन अब निशंक के शिक्षा मंत्री बनने से इसमें सुधार की उम्मीदें जग गई हैं. सबसे बड़ी उम्मीद तो यह जगी है कि राज्य से बाहर चले गए एनआईटी को क्या निशंक राज्य में फिर से स्थापित करवा पाएंगे. इसके अलावा राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को भी दूर कर पाएंगे. राज्य के विश्वविद्यालय ज़रूरी संसाधनों के लिए भी लम्बे समय से जूझ रहे हैं. अब निशंक के मंत्री बनने से क्या ये व्यवस्थाएं दुरुस्त होंगीं, यह बड़ा सवाल है.

ये भी पढ़े : स्वतंत्र देव सिंह बने उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, यहां पढ़ें उनका राजनीतिक करियर


विश्वविद्यालयों की स्थिति सुधरेगी?

बता दें कि राज्य में स्थापित नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एनआईटी का कैम्पस जयपुर शिफ्ट करना पड़ा था क्योंकि श्रीनगर में संस्थान चलाने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं नहीं थी. स्थापना के कई वर्षों बाद भी एनआईटी को स्थाई बिल्डिंग नहीं मिल पायी थी. अब बड़ी उम्मीद यह जगी है कि निशंक शिक्षा मंत्री के नाते इसकी किस्मत बदलेंगे. इसके साथ ही गढ़वाल विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय, दून विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की हालत में भी सुधार देखने को मिल सकता है. उत्तराखण्ड वैसे तो पूरे देश में शिक्षा के लिए अपनी अलग पहचान रखता है लेकिन राज्य के सरकारी संस्थानों की हालत पिछले सालों में बहुत खराब हुई है. पहाड़ से अच्छी प्रतिभाओं के पलायन का एक बड़ा कारण ये भी रहा है. ऐसे में जब रमेश पोखरियाल निशंक शिक्षा मंत्री बने हैं तो हालात सुधरने की उम्मीद की जा सकती है.

शिक्षक से शिक्षा मंत्री तक

उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को क्रांतिकारी परिवर्तन की ज़रूरत है और निशंक इसे बखूबी समझते हैं. न सिर्फ़ बतौर मुख्यमंत्री वह राज्य की ज़रूरतों को समझते हैं बल्कि बतौर शिक्षक भी. निशंक ने अपनी ज़िदंगी की पहली नौकरी शिशु मन्दिर में शिक्षक के रूप में की थी. पहली बार उनकी तनख्वाह तय हुई थी 242 रुपये. चूंकि साहित्य में उनकी रुचि बचपन से थी लिहाजा शिशु मंदिर में पढ़ने, पढ़ाने, लिखने और कमाने का मौका मिल गया. उत्तरकाशी के बाद वे पुरोला फिर देहरादून और जोशीमठ में शिशु मंदिर में प्रिंसिपल रहे हैं.

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Dehradun Hindi News here. देशभर की सारी ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए
NYOOOZ HINDI को सब्सक्राइब करें

Related Articles