महाशिवरात्रि 2018: गोरखपुर में श्रद्धालुओं ने किया भोलेनाथ का जलाभिषेक

संक्षेप:

  • शिवरात्रि के मौके पर सजे शिव मंदिर
  • मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
  • शिवरात्रि पर की गई विशेष तैयारियां

गोरखपुर:  शिवरात्रि पर गोरखपुर के मंदिरों में भक्‍तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह-सुबह श्रद्धालुओं की भीड़ ने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और बेलपत्र, भांग, दूध, धतूरा, मदार आदि का भोग भी लगाया। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव की उपासना का महापर्व महाशिवरात्रि एक अलग महत्व रखता है। महानगर के सभी मंदिरों में महाशिवरात्रि की विशेष तैयारियां की गई हैं। महादेव झारखण्डी मंदिर कूड़ाघाट, गोरखनाथ मंदिर, हट्ठी माता मंदिर मियां बाजार, गोलघर काली मंदिर, राप्तीनगर शिवमंदिर, मुक्तेश्वरनाथ मंदिर राजघाट, मान सरोवर मंदिर, शिवपुरी कालोंनी स्थित शिव मंदिर, बेतियाहाता स्थित शिव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सोमवार को विशेष साफ-सफाई की गई।

शिवालयों पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उन्हें किसी प्रकार की समस्या न होने इसके लिए मंदिर प्रशासन, प्रशासन और पुलिस प्रशासन की तरफ से विशेष व्यवस्था की गई है। शिव मंदिरों के बाहर भोलेनाथ की पूजा में प्रयोग होने वाले विशेष सामानों गन्ना, बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार, गन्ना आदि बेचने वालों की दुकानें भी सज गयी हैं। वहीं नगर निगम की तरफ से शिव मंदिरों की तरफ जाने वाली सड़कों की साफ-सफाई कर चूने का छिड़काव आदि भी कर दिया गया है।

ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पाण्डेय, आचार्य शरद चंद्र मिश्र, आचार्य अशोक पंडित के अनुसार, सागर मंथन के पौराणिक आख्यान में कालकूट नामक विष की उत्पत्ति का वर्णन है। इस विष की ज्वाला से समस्त जगत में त्राहि-त्राहि मच गई थी। भगवान शिव ने भक्तों की प्रार्थना पर उस विष का पान कर संसार को विषमय प्रदूषण से मुक्त किया। जिस दिन समुद्र मंथन से कालकूट विष निकला था, उस दिन को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि शिवरात्रि को शिवलोक से अमृतमयी धारा पृथ्वी लोक पर आती है और प्राणियों का कल्याण करती है।

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