गोरखपुर का रण: रवि किशन और राम भुआल निषाद में किसे चुनेंगे निषाद वोटर?

संक्षेप:

  • माना जा रहा है कि इस बार भी लोकसभा चुनाव में निषाद वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं
  • गोरखपुर सीट पर 19 मई को मतदान है.
  • गोरखपुर में तकरीबन 3.5 लाख निषाद वोटर है. 

गोरखपुर: पिछले महीने विपक्षी एसपी-बीएसपी गठबंधन को उस वक्त बड़ा झटका लगा था, जब निषाद पार्टी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का दामन थाम लिया था. 2018 के उपचुनाव में एसपी कैंडिडेट प्रवीण निषाद (अब बीजेपी में) ने योगी आदित्यनाथ के गढ़ में जीत दर्ज करते हुए यहां से पहला निषाद एमपी बनने में कामयाबी हासिल की थी. इसके बाद से राजनीतिक मंथन में निषाद वोटों की अहमियत पर चर्चा का दौर शुरू हो गया था. माना जा रहा है कि इस बार भी लोकसभा चुनाव में निषाद वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. गोरखपुर सीट पर 19 मई को मतदान है.

गोरखपुर में तकरीबन 3.5 लाख निषाद वोटर हैं

गोरखपुर में तकरीबन 3.5 लाख निषाद वोटर हैं और निषाद पार्टी की समुदाय पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. बीजेपी को उम्मीद है कि एनडीए में निषाद पार्टी की एंट्री से उसे लाभ मिलेगा. हालांकि हमारे सहयोगी इकनॉमिक टाइम्स की पड़ताल में नजर आया कि बीजेपी कैंडिडेट और भोजपुरी एक्टर रवि किशन के बजाए निषाद वोटर एसपी कैंडिडेट राम भुआल निषाद की तरफ मुड़ रहा है.

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जब सिर्फ 7000 वोट से जीते थे योगी

गोरखपुर में कुल मतदाताओं का 15 प्रतिशत निषाद वोटर हैं. 1999 में जब योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार यहां से चुनाव लड़ा था तो एसपी कैंडिडेट राजमती निषाद के खिलाफ उनकी जीत का अंतर घटकर महज 7000 पहुंच गया था. इसके बाद से तकरीबन सभी पार्टियों ने निषाद कैंडिडेट को टिकट देने का प्रयोग किया लेकिन योगी की जीत का अंतर बढ़ता गया. उपचुनाव से पहले हुए 3 चुनावों में बीजेपी का वोट प्रतिशत कभी 50 प्रतिशत से नीचे नहीं गया. 2014 में एसपी और बीएसपी दोनों ने निषाद कैंडिडेट उतारा था लेकिन दोनों को मिलाकर 39 प्रतिशत वोट मिले जो योगी को मिले 52 प्रतिशत वोटों से काफी कम था.

उपचुनाव में एसपी का वोट शेयर 49 प्रतिशत पहुंचा

2018 के उपचुनाव में बीएसपी ने एसपी कैंडिडेट प्रवीण निषाद का समर्थन किया था, जिसकी वजह से एसपी का वोट शेयर बढ़कर 49 प्रतिशत पहुंच गया था. वहीं बीजेपी का वोट शेयर गिरकर 47 प्रतिशत हो गया था. पिपराइच विधानसभा क्षेत्र के खुटहन बाजार में एक बैटरी की दुकान चलाने वाले ज्ञान प्रकाश निषाद (36) कहते हैं, `प्रवीण निषाद के एनडीए के साथ जाने के फैसले से समुदाय नाराज है. एसपी ने एक निषाद को टिकट दिया है और हमारा वोट हमारी जाति के उम्मीदवार को जाएगा.

`निषाद दूसरी जाति को वोट नहीं देगा`

जंगल डुमरी नंबर एक के महेश चंद्र निषाद कहते हैं, `मैं निषाद पार्टी का समर्थक हूं लेकिन बीजेपी को वोट नहीं दूंगा. अगर कोई निषाद कैंडिडेट खड़ा होता है तो कोई भी निषाद दूसरी जातियों के उम्मीदवारों को वोट नहीं देता है. हालांकि निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद अलग राय रखते हैं. निषाद बहुल इलाकों में बीजेपी के लिए प्रचार में जुटे संजय निषाद ने कहा, `मैं एनडीए में इसलिए शामिल हुआ क्योंकि अखिलेश यादव ने वादा किया था कि वह मुझे महाराजगंज से और मेरे बेटे प्रवीण निषाद को गोरखपुर से टिकट देंगे.

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