कानपुर हिंसा में जेल भेजे गए छह निर्दोषों को रिहा करने की चल रही तैयारी, अधिकारियों ने वकीलों से ली विधिक राय

संक्षेप:

  • कानपुर हिंसा में जेल भेजे गए 6 निर्दोष।
  • परिजनों के पुलिस के सामने रखे मजबूत सबूत।
  • स्क्रीनिंग कमिटी ने मानी पुलिस की गलती।

कानपुर. नई सड़क हिंसा के मामले में छह आरोपियों को पुलिस ने जेल भेज दिया। उनके परिजनों की कड़ी पैरवी और मजबूत सबूत के आगे पुलिस को भी झुकना पड़ा। अब इन निर्दोषों को जेल से बाहर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस इनके लिए कोर्ट में 169 की रिपोर्ट लगाएगी। रिपोर्ट कैसे लगाई जाए इस पर शुक्रवार को अधिकारियों ने सरकारी वकीलों से विधिक राय भी ली है। कोर्ट में पुलिस की रिपोर्ट जाने के बाद कोर्ट उस पर विचार कर अपना निर्णय देगा।

नई सडक़ हिंसा में पुलिस अब तक 62 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। जब पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर रही थी उसी दौरान यह भी आरोप लगने लगे कि शातिरों की भीड़ में कई ऐसे भी हैं जो बिल्कुल निर्दोश थे और उन्हें भी पुलिस ने उठाकर जेल भेज दिया है। जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तब पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा के निर्देश पर ज्वाइंट सीपी आनंद प्रकाश तिवारी की अध्यक्षता में स्क्रिनिंग कमेटी का गठन किया।

स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में चिन्हित हुए थे छह लोग

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छह जून को कमेटी का गठन होने के बाद से 28 जुलाई के बीच कमेटी ने पांच बैठकें की। इसमें जेल भेजे गए सभी आरोपियों की भूमिका को ठीक से समझा गया। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में जो सबूत और तथ्य पुलिस के सामने आए उसमें छह लोगों को चिन्हित किया गया, जिन्हें पुलिस ने भी माना कि यह गलत जेल भेज दिए गए हैं। अब पुलिस इन्हें जेल से निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

169 की रिपोर्ट देगी कोर्ट में

पुलिस अधिकारी के मुताबिक इस मामले में शुक्रवार को 169 की रिपोर्ट को लेकर विधिक राय ली गई। जिसमें पुलिस ने यह जानकारी ली कि कोर्ट में 169 की रिपोर्ट दाखिल करने पर कोर्ट उसमें संभवता किस प्रकार के सवाल जवाब कर सकती है। माना जा रहा है कि परिजनों ने यह साबित कर दिया कि उनके लोग घटनास्थल पर घटना के समय मौजूद ही नहीं थे। इसपर बड़ा सवाल यह उठा कि आखिरकार पुलिस ने उन्हें किन सबूतों के आधार पर जेल भेज दिया था।

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