नागरिकता संशोधन कानून पर UN ने चिंता जताई, कहा- यह कानून बुनियादी रूप से भेदभाव करने वाला है

संक्षेप:

  • संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चिंता जताई है.
  • उनका कहना है कि यह कानून बुनियादी रूप से भेदभाव करने वाला है.
  • जारी बयान में उम्मीद जताई गई है कि सुप्रीम कोर्ट नए कानून की समीक्षा करेगा. 

जेनेवा: संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि यह कानून बुनियादी रूप से भेदभाव करने वाला है. मानवाधिकारों की स्थिति पर नजर रखने वाली उसकी संस्था यूएनएचसीआर ने एक बयान जारी किया है. इसमें कहा गया है, ‘हम इससे चिंतित हैं कि भारत के नए नागरिकता संशोधन कानून की प्रकृति मूल रूप से भेदभाव करने वाली है.’ बयान में आगे कहा गया है कि सताए गए समुदायों को सुरक्षा देने का मकसद स्वागत योग्य है, लेकिन इसमें पक्षपात नहीं होना चाहिए.

वहीं यूनाइटेड नेशन्स के जेनेवा ऑफिस ने भी ट्वीट कर चिंता जाहिर करते भारत के सुप्रीम कोर्ट से आशा जताते हुए कहा है कि भारत का नागरिकता संशोधन कानून की प्रकृति बुनियादी रुप से भेदभाव वाली है और भारत के उच्चतम न्यायलय को भारत के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार के दायित्वों को ध्यान में रखकर नीतिसंगत फैसला करना चाहिए.

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यूएनएचसीआर का कहना है कि सम्मान, सुरक्षा और मानवाधिकार हर शरणार्थी का हक है. संस्था के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में उम्मीद जताई गई है कि सुप्रीम कोर्ट नए कानून की समीक्षा करेगा और इस बात की सावधानी से समीक्षा करेगा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों को लेकर भारत के दायित्वों के अनुरूप है या नहीं.

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