अपनी मां सोनिया की तरह प्रियंका ने भी बुरे वक्त में संभाली कांग्रेस की कमान

संक्षेप:

प्रियंका गांधी राजनीति में कदम रख चुकी हैं, प्रियंका गांधी भी अपनी मां सोनिया गांधी की तरह राजनीति में तब आई जब कांग्रेस पार्टी की खस्ता हालत थी। दरअसल, मां-बेटी का का भारत में राजनीतिक सफर किसी बॉलीवुड फिल्‍मी कहानी से कम नहीं हैं। बात अगर सोनिया गांधी की करें तो भारतीय राजनीति में सोनिया गांधी किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। इतालवी मूल की होने के बावजूद सोनिया ने यहां राजनीतिक सफलता की बुलंदियों को छुआ और एक वक्‍त में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की पर्याय बन गईं।

सोनिया गांधी कभी भी राजनीति में कभी भी नहीं आना चाहती थी। लेकिन राजीव गांधी की मौत के बाद 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष चुनी गई थी। लेकिन तब भी उन्‍होंने इससे दूरी बनाए रखी। वह साल 1996 तक पार्टी से दूर रहीं। यह वह दौर था, जब कांग्रेस को सबसे अधिक नुकसान हुआ था। सालों बाद वह 1997 में सक्रिय राजनीति से जुड़ने को लेकर खुद को मना पाईं। 

सोनिया ने कांग्रेस के लिए जो योगदान दिया है उससे नकारा नहीं जा सकता। कांग्रेस के कई नेता भी यो मानते है कि उनके प्रयासों की बदौलत ही पार्टी को एक बार फिर उठ खड़ा होने में मदद मिली। सोनिया ने पार्टी को  संभआलने के साथ साथ  UPA की अध्‍यक्ष के तौर पर सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) और ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को मूर्त रूप देने में भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई।

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वहीं अभी तक 47 साल की प्रियंका खुद को कांग्रेस की गतिविधियों से अलग रखते हुए अपने परिवार के लिए काम करती रही हैं। उनका दायरा अब तक विशेष तौर पर मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्रों रायबरेली एवं अमेठी तक सीमित रहा है। प्रियंका का जन्म 12 जनवरी, 1972 को हुआ था। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल करने वाली प्रियंका की राजनीतिक गतिविधि की शुरूआत 1998 में मां सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद हुई।

1999 के आम चुनाव में सोनिया गांधी उत्तर प्रदेश के अमेठी और कर्नाटक के बेल्लारी सीट से एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ीं। इस दौरान प्रियंका ने अमेठी के प्रचार की कमान संभाली। सोनिया ने 2004 में अमेठी की सीट बेटे राहुल गांधी के लिए छोड़ी और खुद रायबरेली चली गईं। इसके बाद प्रियंका ने रायबरेली और अमेठी दोनों क्षेत्रों में प्रचार की जिम्मेदारी संभाली। बीजेपी ने जब राजीव गांधी के करीबी रहे अरुण नेहरू को रायबरेली से उम्मीदवार बनाया तो प्रियंका ने वहां की जनता से जो कहा वो बड़ी सुर्खिंयां बना।

उस वक्त प्रियंका ने कहा कि मुझे आपसे से शिकायत है... एक व्यक्ति जिसने गद्दारी की और जिसने अपने भाई की पीठ में छुरा घोंपा, आप ऐसे व्यक्ति को यहां कैसे रहने दे सकते हैं? उसकी यहां आने की हिम्मत कैसे हुई? वह अक्सर रायबरेली का दौरा करती रहती हैं और चुनाव के समय वह कई दिनों तक प्रचार करती रही हैं। कई मौकों पर अपने भाई राहुल गांधी का खुलकर बचाव करती आई हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इसका उदाहरण भी देखने को मिला जब मोदी लहर के बीच बीजेपी ने स्मृति ईरानी को अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव में उतारा तो प्रियंका ने अपने भाई के पक्ष में चुनाव प्रचार का मोर्चा संभाल लिया और जीत सुनिश्चित की। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए गुजरात मॉडल पर तंज किया था।  

कई बार की हैं राहुल गांधी का खुलकर बचाव

कई मौकों पर अपने भाई राहुल गांधी का खुलकर बचाव करती आई हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इसका उदाहरण भी देखने को मिला जब मोदी लहर के बीच भाजपा ने स्मृति ईरानी को अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव में उतारा तो प्रियंका ने अपने भाई के पक्ष में चुनाव प्रचार का मोर्चा संभाल लिया और जीत सुनिश्चित की। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए गुजरात मॉडल पर तंज किया था।

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