इलाहाबाद कल आज और.... `मैग्नाकार्टा` से `महामना उद्यान` तक

इलाहाबाद कल आज और.... `मैग्नाकार्टा` से `महामना उद्यान` तक

गोरी सरकार ने कितने ही रणबांकुरों को मौत के घाट तब उतार दिया था। कम्पनी बाग का क्षेत्र हो अथवा पुराने चौक का इलाका।

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इलाहाबाद: कल आज और... परम्पराओं में जीने वाला `कीडगंज मुहल्ला`

इलाहाबाद: कल आज और... परम्पराओं में जीने वाला `कीडगंज मुहल्ला`

"कीडगंज"  की पहचान में जुड़ी है, तीर्थराज प्रयाग के तीर्थ पुरोहितों की पारम्परिक जीवन शैली। आज भी उसी शैली, शौक, शान से जीना ही नहीं चाहता बल्कि तमाम विसंगतियों से जूझता अपने `पण्डा` होने के गर्व को दुहराता यथावत आगे बढ़ रहा है। परिस्थितियों के चलते आज यहां के बाशिंदों को बहुत सम्पन्न नहीं माना जा सकता। दरअसल पीढ़ियों की आरामतलब जिं ...(विस्तार से पढ़ें)


इलाहाबाद: कल आज और...  लल्लन टॉप है दारागंज

इलाहाबाद: कल आज और... लल्लन टॉप है दारागंज

गंगा-जमुनी तहजीब से दीदार करना है, तो वैदिक शहर इलाहाबाद के `हाईटेक` होने की पेंग के साथ दारागंज मुहल्ले में भ्रमण करना होगा, जहां एक ओर संस्कृत देववाणी के श्लोकों की अनुगूंज मिलेगी तो इस्लाम की आयतें भी सुनाई पड़ेगी। पूरे दारागंज में कब्र, दरगाह भी खूब मिलेंगे। वैदिक विद्वानों की ज्ञान शालाओं में पाठ प्रयाग के तीर्थ पुरोहितों ब्राह्मणों का समाज ...(विस्तार से पढ़ें)


 अपनी पहचान में हाईटेक की पींग बढ़ाता वैदिक शहर इलाहाबाद कल आज और...

अपनी पहचान में हाईटेक की पींग बढ़ाता वैदिक शहर इलाहाबाद कल आज और...

21वीं सदी की किस पीढ़ी को इलाहाबाद की इस दास्तान का पता है? शायद किसी को नहीं? इलाहाबाद की हर गली कूचे की मिट्टी लखौड़ी ईंटों में झांकिए आपको न जाने कैसी-कैसी कहानियां दफन आपनी मौजूदगी की दास्तान सुनाती हैं।

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करवट लेता अलसाया शहर इलाहाबाद कल, आज और...

करवट लेता अलसाया शहर इलाहाबाद कल, आज और...

अलसाया शहर इलाहाबाद बदल गया है। आज करवट ले रहा है। सदियां बीत गयीं, परन्तु इसकी पहचान जो प्राचीन थी अब अर्वाचीन हो रही है। करवट लेता अलसाया शहर इलाहाबाद में तो शिक्षा के मायने ही बदल गये है। मोह भंग की खेपों ने पलायन को पर लगा दिये हैं।

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